Last Updated Jan - 20 - 2026, 06:04 PM | Source : Fela News
गहनों की मांग घटने के बावजूद चांदी के दाम रिकॉर्ड पर हैं। इंडस्ट्रियल उपयोग, निवेश और वैश्विक सप्लाई ने इसकी कीमतों को ऊंचाई दी है।
चांदी की कीमतों ने निवेशकों और आम लोगों—दोनों को चौंका दिया है। सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी पहली बार तीन लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर गई। यह तेजी तब देखने को मिल रही है, जब बाजार में चांदी के गहनों की मांग पहले जैसी नहीं रही। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठता है—अगर गहनों की मांग कम है, तो चांदी इतनी महंगी क्यों हो रही है? जवाब छिपा है बदलते उपयोग, उभरती तकनीक और वैश्विक सप्लाई डिमांड के गणित में।
गहनों से आगे बढ़ी चांदी की कहानी
आज चांदी सिर्फ आभूषणों तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), 5G नेटवर्क, मेडिकल उपकरण और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। चांदी उत्कृष्ट विद्युत चालक है, इसलिए हाई-टेक इंडस्ट्री में इसका विकल्प मिलना मुश्किल है। खासकर ग्रीन एनर्जी की रफ्तार ने चांदी को नई पहचान दी है— सोलर पैनलों में चांदी का पेस्ट अनिवार्य होता है, और दुनिया भर में सोलर क्षमता बढ़ने के साथ इसकी खपत भी उछल रही है।
तकनीक ने कैसे बढ़ाए भाव
बीते कुछ वर्षों में तकनीक ने चांदी की औद्योगिक मांग को कई गुना बढ़ा दिया है। EV बैटरियों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी का इस्तेमाल बढ़ा है। 5G और डेटा सेंटर्स के विस्तार से भी मांग को बल मिला। इसके उलट, खनन उत्पादन उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाया। नतीजा-मांग तेज, सप्लाई सीमित, और कीमतें रिकॉर्ड पर ।
निवेशकों का बढ़ता भरोसा
सोने के साथ-साथ चांदी को भी सुरक्षित निवेश माना जाता है। वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगाई और कमजोर होती करेंसी के दौर में निवेशक चांदी की ओर झुक रहे हैं। ETF और फ्यूचर्स के जरिए निवेश आसान हुआ है, जिससे मांग और बढ़ी। भारत में पिछले पांच वर्षों में करीब 33 हजार टन चांदी की खपत हुई है - जिसमें जेवर, सिक्के और औद्योगिक उपयोग शामिल हैं।
भारत में कहां से आती है चांदी
भारत में चांदी के सीमित भंडार हैं। राजस्थान के कुछ हिस्सों में उत्पादन होता है, लेकिन घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भरता ज्यादा है। मेक्सिको, पेरू, चिली और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश प्रमुख निर्यातक हैं। वैश्विक आपूर्ति में किसी भी तरह का व्यवधान सीधे भारतीय कीमतों पर असर डालता है।
उद्योगों की बढ़ती जरूरत, ग्रीन ट्रांजिशन और निवेशकों की दिलचस्पी को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव के साथ मजबूती बनी रह सकती है। हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था और ब्याज दरें दिशा तय करेंगी। इतना तय है कि चांदी अब सिर्फ गहनों की धातु नहीं रही यह तकनीक और भविष्य की धुरी बन चुकी है।
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