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अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अमेरिका की दूरी ट्रंप नीति पर सवाल

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अमेरिका की दूरी ट्रंप नीति पर सवाल

Last Updated Jan - 23 - 2026, 03:24 PM | Source : Fela News

डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका ने कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से दूरी बनाई। हालिया घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्वास्थ्य और कूटनीति पर इसके प्रभाव को लेकर चर्च
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अमेरिका की दूरी ट्रंप नीति पर सवाल
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अमेरिका की दूरी ट्रंप नीति पर सवाल

अमेरिका द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से दूरी बनाने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने बीते एक साल के भीतर करीब 70 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, समझौतों और मंचों से खुद को अलग किया या अपनी भागीदारी सीमित की। ताजा मामला WHO से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसे लेकर वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।

सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का तर्क रहा है कि कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अमेरिका के हितों के अनुरूप काम नहीं कर रहीं और उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। WHO के मामले में यह आरोप लगाए गए कि संगठन की कार्यप्रणाली पारदर्शी नहीं है और वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से निपटने में इसकी भूमिका प्रभावी नहीं रही। प्रशासन का कहना है कि अमेरिका अपनी नीतियां स्वतंत्र रूप से तय करने का अधिकार रखता है।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के इस रुख को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि WHO जैसी संस्था से दूरी बनाने से वैश्विक महामारी, वैक्सीन वितरण और स्वास्थ्य शोध पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि अमेरिका WHO का सबसे बड़ा वित्तीय सहयोगी रहा है, ऐसे में फंडिंग और तकनीकी सहयोग पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

वहीं दूसरी ओर, ट्रंप समर्थकों का कहना है कि यह नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ के तहत उठाया गया कदम है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बजाय द्विपक्षीय समझौतों पर जोर देने से अमेरिका को अधिक नियंत्रण और लाभ मिलता है। सूत्रों के मुताबिक, जलवायु समझौतों, मानवाधिकार मंचों और व्यापार से जुड़े कई संगठनों से भी अमेरिका ने इसी सोच के तहत दूरी बनाई।

प्रशासन का कहना है कि अमेरिका पूरी तरह वैश्विक मंचों से अलग नहीं हो रहा, बल्कि अपनी शर्तों पर भागीदारी तय कर रहा है। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार हो रहे इन ‘ब्रेकअप’ से अमेरिका की वैश्विक नेतृत्व भूमिका कमजोर पड़ सकती है। सहयोग की जगह अलगाव की नीति अपनाने से अन्य देश नए गठजोड़ बनाने की दिशा में बढ़ सकते हैं।

बताया जा रहा है कि आने वाले समय में अमेरिका की इस नीति का असर वैश्विक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर साफ तौर पर दिख सकता है। फिलहाल WHO समेत कई संस्थाओं से दूरी का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक अहम बहस का विषय बना हुआ है।

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